गीत
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हम हैं समर्थ क्या कुछ, वश में नहीं हमारे
छू लें अभी चमकते, आकाश के सितारे।
हथियार हैं हमारे- कौशल व बुद्धिमानी
संकल्प-शक्ति, साहस संयम व सावधानी।
थक हार कर कभी भी, हमने कदम न रोके-
अवरोध बहुत आये, लेकिन न हार मानी।
विश्वास है हमारा, इन शक्तियों के बल पर -
हम हस्तगत करेंगे, तय लक्ष्य शीघ्र सारे।
छू ले अभी चमकते, आकाश के सितारे ।
अब एक-दूसरे का, सहयोग हम करेंगे
भ्रातृत्व भाव अपना , कायम सदा रखेंगे।
संसार को नवेली, नव प्रीत-रीत देंगे
इस प्रीत के सहारे, हर जंग जीत लेंगे।
अपनत्व बाँट कर हम, अपनत्व माँग लेंगे
कोई नहीं पराया, सब मीत हैं हमारे।
छू लें अभी चमकते, आकाश के सितारे ।
क्यों चल रहे अकेले, आओ, समीप आओ
तुम साथ में हमारे, मिल कर कदम बढ़ाओ।
मन में न मीत लाओ, संदेह या हताशा
विश्वास के तराने, निर्भीक गुनगुनाओ।
इंसानियत के नगमे, जब तक रहें लवों पर-
होंगे नहीं अलहदा, स्वर आपके हमारे।
छू लें अभी चमकते, आकाश के सितारे ।
#राजेंद्र श्रीवास्तव #
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