बापू की तस्वीर
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बापू की तस्वीर किसी कमरे में
कभी न टाँग सके,
उनके आदर्शों से न जुड़ पाए
न ही भाग सके।
कायम रहीं दूरियाँ अब तक
प्रेम व सद् व्यवहार से,
बढ़ती रही मित्रता प्रतिदिन
बड़ते भ्रष्टाचार से।
सच को अपना नहीं सके
न ही हिंसा को त्याग सके।
उनके आदर्शों से न जुड़ पाए
न ही भाग सके।
करुणा, दया, मनुजता का हम
पाठ कभी का भूल गये,
वैमनस्यता के वृक्षों पर
नित नित बढ़ते शूल नये।
सीखा नहीं क्षमा करना
न क्षमा किसी से माँग सके।
उनके आदर्शों से न जुड़ पाए
न ही भाग सके।
परहित, पीर-परायी भूले-
भुला दिया भाईचारा,
अकर्मण्यता, कुंठाओं में
जकड़ गया जीवन सारा।
होती रही अज़ान, प्रभाती
लेकिन हम न जाग सके।
उनके आदर्शों से न जुड़ पाए
न ही भाग सके।
#राजेंद्र श्रीवास्तव #
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