Friday, 28 September 2018

गीत

   गीत
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दूषण दूर करें गंगा के
चलो जतन सब लोग करें

युगों-युगों तक यह 'माँ गंगा'
'पतित पावनी' कहलाई,
लेकिन वही पुण्य सलिला माँ,
देती दूषित दिखलाई।

जीवनदायी गंगाजल का
सब समुचित उपभोग करें।। दूषण दूर....

हमने गंगा को 'माँ' माना
बेटे बनकर दिखलाएँ,
जो दूषित कर रहे नदी को
टोकें उनको समझाएँ।
करें प्रदूषित जो गंगा को
ऐसे न  उद्योग करें।। दूषण दूर....

कितनी बदबू और गंदगी
घाट-घाट पर है फैली,
हम सब की नादानी से ही
हुई आज गंगा मैली।
संकल्पित श्रम से, गंगा को
निर्मल और निरोग करें।। दूषण दूर....
      ***.         राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव
                       
      


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