Tuesday, 11 September 2018

नवगीत

नवगीत
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तय है , भूखे-प्यासे हैं

चपरासी के
दस पद हैंं

बहुत कठिन
इंटरव्यू है 

दो हजार से
ज्यादा की-
अंत हीन
लम्बी क्यू है  ।

ढली दोपहर
बिन भोजन-
क्यू में खड़े उपासे हैं।

तय है भूखे-प्यासे हैं।

बचपन के
संगी-साथी,
गाँव-गली सब,
बिसर गये।

रोजगार की
आशा में -
बने ठिकाने,
शहर नये।

धीरे-धीरे
खर्च हुए-
पैसे बचे जरा से हैं।

तय है भूखे-प्यासे हैं।

एक गाय-
दो बैल बिके,
बीघा भर का
खेत बिका।

विपदाओं का
यह कुनबा
जब से इस घर
आन टिका।

राहत के-
गिनती के पल
मिलते छठे-छ:-मासे हैं

तय है भूखे-प्यासे हैं।
                #राजेंद्रश्रीवास्तव#





   
   
 

    
  

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