Wednesday, 7 March 2018

मैं नदी हूँ !





मैं नदी हूँ !

नहीं ......

मैं नदी थी..!!

कभीमै भी नदी थी!!!


अतल निर्मल जल,
अनेको जलचरों के संग,
प्रमुदित बह रही थी।

सघन वन,दोनों तटों पर,
पशु-पक्षी साथ -
एकाकी नहीं थी।

आज हूँ  जल -रिक्त,
अब पहिचान मुश्किल -
यह  कैसी नियति थी।

पूछ लेना पूर्वजों से
होंगे मेरे ही सरीखे रिक्त -
तब ऐसी नहीं  थी।

हाँ ,कभी -
मैं भी नदी थी !!


 #राजेन्द्र श्रीवास्तव

No comments:

Post a Comment