मैं नदी हूँ !
नहीं ......
मैं नदी थी..!!
कभी, मै भी नदी थी!!!
अतल निर्मल जल,
अनेको जलचरों के संग,
प्रमुदित बह रही थी।
सघन वन,दोनों तटों पर,
पशु-पक्षी साथ -
एकाकी नहीं थी।
आज हूँ जल -रिक्त,
अब पहिचान मुश्किल -
यह कैसी नियति थी।
पूछ लेना पूर्वजों से
होंगे मेरे ही सरीखे रिक्त -
तब ऐसी नहीं थी।
हाँ ,कभी -
मैं भी नदी थी !!
#राजेन्द्र श्रीवास्तव

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