Monday, 12 March 2018

गीत

गीत
तेरी किस्मत में ईश्वर ने
- लिखी मजूरी कर हरिया।
उठा फावड़ा, चला कुदाली
बिछा सड़क, गहरी कर नाली।
दो रोटी की बड़ी जरूरत-
और नहीं दूसर जरिया।।
तेरी किस्मत में...
चमकें क्या किस्मत के तारे-
भैंस बराबर- आखर कारे।
तेज धूप में गोरी चमड़ी -
हुई आज धूसर करिया।। तेरी किस्मत में....
फटी कमीज, फटी सी धोती-
मुनिया रोज-रोज ही रोती।
बाबा कब लाओगे मुझको-
एक नयी चूनर-फरिया।। तेरी किस्मत में...
#राजेंद्र श्रीवास्तव #

Wednesday, 7 March 2018

मैं नदी हूँ !





मैं नदी हूँ !

नहीं ......

मैं नदी थी..!!

कभीमै भी नदी थी!!!


अतल निर्मल जल,
अनेको जलचरों के संग,
प्रमुदित बह रही थी।

सघन वन,दोनों तटों पर,
पशु-पक्षी साथ -
एकाकी नहीं थी।

आज हूँ  जल -रिक्त,
अब पहिचान मुश्किल -
यह  कैसी नियति थी।

पूछ लेना पूर्वजों से
होंगे मेरे ही सरीखे रिक्त -
तब ऐसी नहीं  थी।

हाँ ,कभी -
मैं भी नदी थी !!


 #राजेन्द्र श्रीवास्तव